
मनः | MANAH
नमस्कार | Namaskar
आप सभी का स्वागत है मनः के इस साइट पर।
मनः मानव के मानस का ही अभिप्राय है। मनः के इस चिर-चंचल दुनिया में आपको अनगिनत कविताएँ, कहानियाँ एवं शैक्षणिक बाते मिलेंगी। हो सकता है संयोगवश इन बातो का सामंजस्य, कभी अपने आप से, या किसी और से बिठा पाए। हमे आपके स्नेह एवं दुलार की आवश्यकता है। हमे सुधरने का मौका हमारी गलती बता कर जरूर दीजियेगा। आपका प्रेम अभिलाषी मनोनय।
Welcome! to the space of 'Manah', a place of fluctuating thoughts that we are trying to serve you in an alphabetical apparel. Manah is one's inherent tendencies/desires/drives. You might connect to these thoughts directly or indirectly relating to your own life.
There will be stories, travel photos, food experiences, poetries, short stories, and thoughts of Manah. Please let us know for any kind of improvements. Yours sincerely, Manonay.

मनोनय | MANONAY
'वसुधैव कुटुम्बकम' की सोच रख कर मैं अपने तरीके से अपने वृहत परिवार से जुड़ने का एक मौका ढूंढ रहा था। कहीं न कहीं या कभी न कभी, हमें ऐसा लगता है की हमारे मन में जो है, बाकियों तक पहुंचना चाहिए या अपनी राय को रखना चाहिए क्योंकि हम अपने सोच की परिधि में सिमित है। संवाद ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो हमे समृद्ध करता है और एक दूसरे से जोड़ता है। मैं अस्थिर प्राणी हूँ, जो जिज्ञासा से भरा और जानने के लिए लालायित रहता है। मेरा 'मनः' के वेबसाइट द्वारा यह सतत प्रयास रहेगा कि मैं आप लोगो तक मेरी अलग-अलग जगहों के, विचारो के, और शैक्षणिक ज्ञान के अनुभवों को आप से साँझा करूँ। मैं आशा करता हूँ कि, कही न कही आपके ह्रदय से एक लगाव सा बन जायेगा और आपसे मैं जुड़ पाऊगा। यक़ीनन, कभी मिलेंगे हमारे-आपके भारत में तब तक के लिए आज्ञा दीजिये। धन्यवाद, आपका मनोजीत (मनोनय)।
With the thought of 'Vasudhaiva Kutumbakam’, i.e. the whole earth is a family, here I am trying to connect with my extended global family. I have never wanted to tie myself down to any one path, and this site showcases the many journeys I’ve taken. I do many different things, but each project I take on I approach with the greatest enthusiasm and focus. Take the time to explore my writing, visuals, travel pictures and experiences, food, and more. I hope you find it interesting and that it sparks something inside you. I hope that somewhere we will touch each other's hearts and make an eternal connection with you. Until we meet in person, somewhere in yours and mine 'India', give me permission. Thanking you, your Monojit (Manonay).
MONOJIT
I’d love to hear from you! Please feel free to get in touch with any questions or comments and I will get back to you as soon as possible.
07806901405
